चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंटिप्पणी-(१) हाँसा—हंसके समान सफेद । गोहूँ—गेहूँ । छार—आग । (४) बडरै-जाठर (खीर) के । १६० (रीडेन्ट्स ११८ : बम्बई १० : पंजाब [क] ) सिफत आवर्दने बर्गाहाये दरख्तान (पत्तियोंका वर्णन) पत्तरिहैं लोग 'तुरैं धन पाता' । छोर न अधरा कीन्हैं निखाता ॥१ महुआ अँब लीन्ह घर पारी' । घर पीपर्र कै बाँधैं' खारीं ॥२ कटहर पकुहर औ लोकर लिये । आमुनँ गुरहर्र' नाँग सब" भये ॥३ कठऊँबर पाकर बहु "तोरी । महुले फदमें दाख फकोरी" ॥४ तँदू गुगुची रीठा घनों । पुरइन पात कररै फो गिनों ॥५ पनवड आइ मनासियत, पानैं लाग कर जोर ।६ नाँग कीन्ह हौँ बारिहैं, पात लीन्ह सबै तोरैं ॥७ पाठान्तर—बम्बई और पंजाब प्रति— (क) आवर्दने बगहाय दरख्तान रा बराये दौंद (?) रा (दाद (?) क निमित्त बनपत्तीका लाना) । (पं) शीर्षक टफ्स्य पोताम अपाठ्य है । १-(प ब) केंह । २-(प) फ्ता । ३-(ब) छोड न : (प) लीकेँह । ४-(ब) भौत; (प) शब्द नष्ट हो गया है । ५-(ब) भारी । ६-(ब) पीपर, (पं) पेड । ७-(ब) बाँधहि । ८-(ब) जारी : (प) शब्द नष्ट हो गया है । ९-(ब) ओ नींबू; (पं) पंक्ति अपाठ्य है । १ -(ब) जाम्य; (प) पूरी पंक्ति अपाठ्य है । ११-(ब) कपियार । १२-(बं) ठभ । १३-(ब) बहु पाखर । १४-(ब) महु बदोदे । १५-(ब) फेंकोरी । १६-(ब) बगुची : (प) बगुचन । १७-(पं) पुरइं । १८-(ब) करन । १' -(ब) इम । २ -(ब) सम । २१-(प) पंक्ति ६-७ अपाटय है ।