भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२७४ १६१ (रौकेन्ड्स ११६। बम्बई ११) आमदने लश्करे गोबर बर रवानये महर व नशिस्तने ईशाँ (मगरिकोंका महरके घर आकर बैठना) महर' मंदिर सब नेत बिछाई । कै खँडवान कुण्ड मराई ॥१ गोबर नोता हुत' सोइ भुलावा । विहवीसो' पार समै लै'आवा ॥२ घटहि न सूसँ सरह जनु चढ़ी । ठपना देस मंदिर गा मढ़ी ॥३ बैस कुँवर गे पांतिहिं पाँती । परखा पीन सो भाँवहिं भाँती ॥४ खोरक महरें पाट बैसारा । गहन भार जैं चाँद उबारा ॥५ घरन घर भरि बैठे, अगनित कही न जाइ ॥६ खेत साथ लहि आँगन, तोहु लोग न समाइ ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—वरास्त करने कतूरी बर खानये राय महर (महरके घर भोजकी तैयारी) । १—महरें । २—राम । ३—हुँच । ४—बैहीचो । ५—पक्ति । ६—सूसहि । ७—कोरम । १६२ (बम्बई १२। रौकेन्ड्स १२) आमदने तमाम दर मज्लिसे हरकिन्त (नाना प्रकारके व्यंजनोंका परसा जाना) बैठी पार पसारि पँवारा । मात परोसहिं झार सुवारा' ॥१ पतरी भरहिं मूँस बछवानों' । भाँतहिँ भाँति लोर पहँ आनों ॥२ मास ममोरों खरवों फुनि भरी । ढानों सौ सो गुन पत धरी ॥३ लै मसमार तुलाने नाऊ । धिरत खाँड कीन्ह पैराऊ ॥४ घर पकवान जेवहुँत कजे । फल सन्धान साख एक अहे ॥५