भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 205

१७६ १६४ (रौशनस १९२) दर जाने अजदने इश्क दर गिरिया कर्दने लोरिक (लोरिकका घर आना और लोरिकका दुःखी होना) सैं लोरक घर सेज ओलारा। बहई नैन फाँचइ असरारा ॥१ खोलिन रोवइ फाइ यह मया। मोर मार फँ पचहँडा दिया ॥२ लोग कुटुंब बंधु जन आये। पंडित बैद सयान पुलाये ॥३ धर नौरिफा बैद अस कहही। चाँद सुरुज दुइ निरमल अ[हहीँ*] ॥४ बात न पित्त रकत न सीऊ। ताप न जूरी चित्त सँमीऊ ॥५ देउ न दानौँ झरकौँ, यह सीर बरियारि। ६ मन काम कर बिया, ता बहु रे सुगारि ॥७ टिप्पणी-(१) ओलारा-निर्जीव होकर पड़ रहना। फाँचइ-कराहे। (२) बार-बार पुनः। पचहँडा-मरणके दशवें दिन घरसे निकाल कर बाहर दूर रखे जानेवाले मिट्टीके पाँच पात्र; किसी व्यक्तिके रोगको दूसरे व्यक्तिके ऊपर डालनेकी क्रिया; उतारा फ्लाय। (३) सयान-ओझा झाड़ फूँक करनेवाले। (४) धर-पकड़ कर। नारिफ-नाड़ी। (५) सीऊ-शीत। ताप-ज्वर। जूरी-ठण्ड लगकर आनेवाला ज्वर, मलेरिया। (६) देउ-देव। दानौँ-दानव। सीर-रोग। बरियारि-बहुत बड़ा। १६५ (रौशनस १९३) ऐजन (वहु); दर गिरिये लोरिक गोयद (लोरिकका विलाप) सुरझ रैन महँ गयउ सुझाई। चँदर छोत निसि आगे आइ ॥१ खोलिन नीर ढार सरपिया। महु मूयों महँ छोरक जीया ॥२ हौं जस जीठ बीठ इह देऊं। लोरक फेर माँग कें लेऊं ॥३