चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७८ १६७ ( रौकन्ट्स १२५ ) खुरने लोकिन बिरस्पत रा बर महक व दीदने बिरस्पत लोरक रा ( बिरस्पतका घरके भीतर जाकर लोरकका देखना ) पल खोलिन तोर कहाँ रोगी । मकु औखद जानउँ यहि जिउकी ॥१ सेजइ खोलिन लोरक ठाऊँ । देखसि क्या सीस धड़ पाऊँ ॥२ सुरुज भरहिं बिरस्पत आइ । नैन उघार चँदर बिहसाइ ॥३ गुनि गुनि देखि अग कै पीरा । कठन गरह करिरहै तुम्ह पीरा ॥४ यह गुन गुनी तिरी परछाना । यह बियाधि न आखद जाना ॥५ महर भंडार भंडारी औ चाँदा कँ भाइ ।६ नैन उघार मात कहु, आयउँ आइ भुलाइ ॥७ टिप्पणी—(१) मकु = कदाचित । (५) बियाधि—(स व्याध) रोग । औखद—औषधि । १६८ ( रौकन्ट्स १२२ ) दूर सुरने लोकिन व गुप्तने लोरक हिदायते दीदने चाँदा बा बिरस्पत ( लोकिनका हट जाना और लोरकका बिरस्पतसे चाँद-दर्शनकी बात कहना ) बननि जो चाँद कइ बोल आहा । सहसकरों सुरुज परकासा ॥१ कहसि अननि यह मदन कहाँ । तार लाव सर्जास अहीं ॥२ खोलिन बाइ और तह ठाढी । लारक पीर हियँ कँ काढी ॥३ जिहिं दिन हूँ बउनार भुलाना । महर मंदिर काहू दिखरावा ॥४ सो जिउ लगइ कही न आइ । दिन जिउ भयउँ परेउँ पहराइ ॥५ मोगहरू मपूरन, चाँद जात परगाम ।६ पीतु चमरु पइ चमरी बैठि घाघहर पास ॥७ टिप्पणी—(३) पीर—हृदय व्यथा । ( ) पहराई—बहकर गिरना ।