चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०९ १६९ (रीट्सबर्ग १२७) मना कर्दने बिरस्पत लोरक रा कि इन हिकायत न गोयद (बिरस्पतका इस बातको छिपा रखनेको लोरकसे कहना) सुनु लोरक अस पात न कहिये। जो कहै इँह देस न रहिये ॥१ यह तो आइ महर के जिया। चाँद नाउँ चौराहर दिया ॥२ सो तैं दीख बीजु बरियारी। लखैं तोर चितै गई न मारी ॥३ तरइँह चाफर सेज बिछावहिं। सपनैं नखत निसि पहरे आवहिं ॥४ मन कै सांक हिंयेहुत धोवहु। अँखैं मूँज सुख निदरा सोवहु ॥५ इव राजा के दुआर, औ निसि सरग असेर ।६ जिहँ का राज पिरिय में, तिहँ तू गरब न हेर ॥७ टिप्पणी-(४) तरइँह-तारागण । सपनै-सभी। (५) अँखैं मूँज-या पीकर। १७० (बम्बई १६; रीट्सबर्ग १२८) मिन्नत कदन लोरक पेश बिरस्पत (लोरक्का बिरस्पतसे अनुनय) चाँद क उतर बिरस्पत कहा। सुरुज दुहूँ पायन पर रहा ॥१ आजु बिरस्पत सुदिन हमारा। मुस्ताकॅवल जिहँ देखि तुम्हारा ॥२ कहु सो बात जिहूँ होइ पिरावा। भल ओ करैं भलाई पावा ॥३ कै मिस लै मोहिं आन जियावहु। कै सो मॅत्र-बिधि आज जियावहु ॥ किरपाव दम नव मूँह मेरा। पाँय परतें बिरस्पत ठेला ॥५ पाँय न टतु बिरस्पत, हा वो पर तुम्हार ।६ बचन तार मँहि आसद, खसि न सीसँ हमार ॥७