चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ पाठान्तर—सम्बर प्रति— शीर्षक—ब पाये उस्तादने लोरक ब इलहाहे बिसियार नमूदने ऊ (लोरुक का बिरसपतक पाँव पड़ना और अनुरोध करना)। १—भहारा। २—ओ। ३—अरे नो। ४—कँहि म। ५—दैरे। ६—दरे। ७—उभे। ८—पाइ। टिप्पणी—(१) मिराबा—मिलाप। (५) देखा—दराया। १७१ (रीड्सूम १२९) शीर्षक- मामोफ्तने बिरस्पत मर लोरक रा (बिरस्पतका लोरकको उपाय बताना) बिरसपत देखि लोर कर कया। मरन सनेह उठी मन मया ॥१ पाय छाडु लोरक ल मानी। आँखद् करां पीर तोर जानी ॥२ लोरक तोर कहा मैं मानौं। कै हौं कै तूँ अउर न जानौं ॥३ जो लोरक इहँ घात उबारा। मइँ करपना घरु झाँगी मारा ॥४ सुनु बिधि मोरी ताइ मइँ सेवहु। मैं लै वाष पुजायहु [दिबहु*] ॥५ गुर्ताँ रूप होइ बैठउँ, कया भभूत चढ़ाइ ॥६ दरस निकट जो भगत, देखि नैन अघाइ ॥७ टिप्पणी—(१) कया—काया शरीर। मया—ममता। (३) कै हौं कै तूँ—या तो मैं या फिर तुम। (४) झोंघी—जोगी। मारा—दाना घञ। ( ) वाघ—चाहूँगी। (५) गुर्त्ता—(फारसी) देवता यहाँ तात्पर्य जोगी रूपसे है। भभूत—भस्म। १७२ (रीड्सूम १३) शीर्षक आमदन बिरस्पत बज महले लोरक व पाये उस्तादने लोरिकिन (बिरस्पतके बाहर आनेपर लोरिकका पाँव पड़ना) फइ बिरस्पत बाहर भइ। खोलिन सेइ पाय कै सइ ॥१ सीस चढ़ायसु पागं धूरी। आस मोर जनु छीजै धूरी ॥२