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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१८१ खोलिन चँदर मेघ घिरि आवा । सूरुज गहमहुत सोइ छुड़ावा ॥३ भा सुख भरम चित जनि धरहू । न्हाइ धोइ कुछ अरघ फरहू ॥४ थोरहिं घरी चैन कै पाई । बागा सुरुज चँदर मिहसाई ॥५ भरम न करहु खोलिन चित मँह, लोरक लै अन्हवावहु । ६ अरु कुछ अरघ दरब बार, तिहि पाहर दे पठावहु ॥७ टिप्पणी—(१) खेह—धूल । (२) धूरी—धूलि । जनु—मत । धूरी—चूरचूर करना । (३) गहुन—ग्रहण । हुत—था । (४) अरघ—अर्घ पूजन उपचार । (५) अन्हवावहु—स्नान कराओ । (७) बार—निछावर करके । १७३ ( रीकीन्स १३१ ) बंदक कदने गाकिन बिरस्पत रा बज लेहवे गारक ( न्होलिन का बिरस्पतसे बाहा करना ) जिहैं दिन लोरक उठी नहाई । लोग कुटुंब में करब मधाई ॥१ तिह पहिराँवों चीर अमोला । जो सूचा आये लोरखँ छूता ॥२ गइ बिरस्पत मिहिं सब तारा । औ निसि चाँद करै उजियारा॥३ किये सेउ सब सुरुज फे[रा*] । चाँद तरायीं सोवन कँ फेरा ॥४ पान मँग निसि चाँदा रानी । नखत तराइ कहहिं कहा[नी*]॥५ चाँद नउत लै तारा, बैठि धौराहर जाइ । ६ लोर लाग तिहँ चिंतइ, कहि जो बिरस्पत आइ ॥७ टिप्पणी—(१) करब—करूँगी । (२) चीर—साड़ी । अमोला—अमूल्य । सूचा—शुभ ग्रह । (४) सोवन कँ फेरा—सोने के लिए भेजा ।

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