चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८२ १७४ ( संक्षिप्त १९२ ) जोगी शुदने गोरख व नशिस्तन दर बुतख़ानये खुद ( मन्दिरमें गोरखका जोगी बन कर बैठना ) सुवन फटिक मुँदरा सरसेली । कण्ठ जाप रुद्राफैं मली ॥१ चकर जगाँग गूँथी कंथा । पायें पावरी गोरउपन्था ॥२ मुंड मभूत कर गही अधारी । छाला पंस क आसन भारी ॥३ दण्ड अधर बैन कैं पूरी । नेइ आरचा गावइ झारी ॥४ कर किंगरि तिहूँ बार बजावइ । जिहूँ घाँदा सुरस चितरा पावइ ॥५ सिध पुरुउ मढ़ि बैठउ, घर घर घर दुआर ।६ मगत मोर मनखंड गये, फाँद नाम ना निसार ॥७ टिप्पणी—(१) सुवन—श्रवण कान। फटिक—स्फटिक। मुँदरा—मुद्रा कानमें पहननेका कुण्डल। सरसेली—छेदकर पहना। जाप—माला। दरा—रुद्राक्ष। (२) चकर—चक्र सम्भवतः छोटी गोल अँगूठी जिसे पबित्री कहते हैं (वामुरेशाकरण अप्रकास) । जगौटा—(सं योगपट्ट) वह वस्त्र जिसे जोगी ध्यान करते समय घिरने पैरों तक डाल लेते हैं। अन्य अवस्था- में यह कन्धे पर रहता है। कंथा—कथरी, गुदड़ी कटे-पुराने कपड़ोंसे बनाया गया वस्त्र। पायें—पैर। पावरी (स पादरक्षा>पा पायक्खइ
पावड>पावडा पौवरि)—खड़ाऊँ। (३) अधूत—भस्म। अधारी—लकड़ीका बना सहारा जिसको देखकर योगी बैठते और सोते हैं। छाला—चर्म। सम्भवतः यहाँ व्याघ्रचर्मसे तात्पर्य है। जायसीने जोगी वेषक प्रसंगम वघछालाका उल्लेख किया है (पदमावत १९६।६)। ( ) किंगरि—छोटा शिकारा या सारंगी जिसे बजाकर जोगी भीख माँगते हैं।