चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८४ १७५ ( रीकेन्स १३३ ) एक साल परसीदने लोरक बुत रा, व आमदने चाँदा व सहेलियान दर्रॉ ( लोरकका एक साल तक मन्दिरमें तप करना : चाँदा सहेलियोंके साथ आना ) एक बरसि लोरक मढ़ि सेवा । चाँद सनेह मनायसि देवा ॥१ कातिक परब देवारी आई । दार परी रितु खेले गाई ॥२ चाँद बिरस्पत लीन्ह हँकारी । आवहु देखै जाँहि देबारी ॥३ सखी सात एक गोहन लागीं । रूप सरूप सुभागिन मार्गी ॥४ अबरत चाँद चली लै तहाँ । गाएँ देवारी खेलैं जहाँ ॥५ सुरन फूल चाँदा लै, एक हुत मेला आइ ।६ पहिरत हार टूटि गा, मोतिह गये छरियाइ ॥७ टिप्पणी-(४) सात-साठ पाठ भी सम्भव है । (५) अबरत-एक हुत पाठ भी सम्भव है । (६) एकहुत-अबरत पाठ भी सम्भव है । (७) छरियाइ-बिखर गये । १७६ ( रीकेन्स १३४ ) शिकस्तने हारे मुरवारीदे चाँदा दर बुतखानये व बर्गफदन सहेलियाँन (चाँदका मोती-माल टूटना और सखियोंका मोती बटोरना ) समर मोतिइ लैँ घोइ पानी । चाँद कलफ चितहि लजानी ॥१ सननि जो पूछि तो कस कहहूँ । कवन उतर उन ऊपर देउँ ॥२ पोता सखिह छाँइँ मढ़ि लीजै । हार पिरोइ चाँद कहँ दीजै ॥३ आइ बिरस्पत हेरि हँकारी । चाँद बचन सुन भइ मँघियारी ॥४ मढ़ि सुहाउ आँ छाएँ सुहाइ । चाँद सरी लै पैठी जाइ ॥५ मानिक मोति पिरोयहिं, गचि गचि पार हार ।६ पैठ चाँद बिरस्पत, सूरूज मढ़ि दुआर ॥७