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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१८४ १७७ (रोहिङ्ग्स ३१५) गन्बरे जोगी कर्दने सहेलियों बर चाँदा रा (सहेलियोंका चाँदाको जोगीकी सूचना देना) झाँउ सहेलिहँ चाँदहि कहा। इंद मदि मँह एक आयसु अहा ॥१ अति रूपवन्त राजपुत आहे। सुरूज मदि निकर आये चाहे ॥२ करक ऊँच आहु भिखारू। मदिर घेरे बीर अपारू ॥३ कौन जननि अरमेउँ अस बारा। सहसकराँ भयउ उजियारा ॥४ नागर छल सुभागैं भरा। करम जोत मनु माथें परा ॥५ चाँद कहा तराई, सुरूज देखउ आइ ।६ अस भगवन्त जो देखइ, दिसत पाप झर जाइ ॥७ मूलपाठ—पंक्ति ४ और ५ के उत्तर पद मूल प्रति में परस्पर स्थानान्तरित हैं। टिप्पणी—(१) झाँउ—झाँक कर। (७) दिसत—देखते ही। झर जाइ—गिर जाये नष्ट हो जाये। १७८ (रोहिङ्ग्स ३१६) सलाम कर्दने चाँदा व बिहोश शुदने जोगी (चाँदाका प्रणाम करना और जोगीका मूर्च्छित होना) चाँद सीस भगवन्तहिं नावा। भा अचेत मन चेत गँवावा ॥१ सँभर मन देखन गुन गभउ। नेव चरन मुख फेंफर भयउ ॥२ नैन झरहिं अति कया सुखानी। धनि धानुक चख इना पिनानी ॥३ नैन दिस्टि चाँदा लायसु। दहा खाइ न सो देखें पायसु ॥४ भाँइँ फिराइ चाँद गुन सानी। नैन बान मिस हनों सयानी ॥५ काट दीन्ह अस पफर देबारैं, रकत कीन्ह परबारि ।६ दउ गपी घर धरती, सँबर देउ हुभारि ॥७ टिप्पणी—(२) फेंफर—कान्तिहीन; धुंधला हुआ।