चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८७ १७९ ( रिसंग्रहम १२७ ) बाज गश्तन चाँद अज़ बुतखाना व आमदने ब खानये खुद ( चाँदका मन्दिरसे घर लौटना ) बाहर मदिर चाँद जो आई । सूरुज दिसत मुख गा कुँमलाई ॥१ पूछी चाँद बिरस्पत धाई । काह कहाँ कछु कही न जाइ ॥२ जोहि सीस मँझि कहुँ नाया । परा मुरुस मुख बकत न आवा ॥३ डार्य पाउ सर हर न सँभारी । धुन धुन सीस मंदिर सौं मारी ॥४ हार पिराइ सहेलिहिं दीन्हा । हँस कें चाँद पहिर गिय लीन्हा ॥५ कहा बिरस्पत चाँदा, चलहु बेग घर जाहिं ।६ चाँद सुरुज हैं अँधवत, महरी घरे डराहिं ॥७ टिप्पणी—(१) जोहि—जैसे ही; जिस समय; कर । बकत—बोली आवाज । (४) पाउ—पैर । (७) अँधवत—डूब रहे । घरे—घर पर । १८०-१८१ ( अप्राप्त ) १८२ ( रिसंग्रहम १२८ । बम्बई ९ ) बकियत दर तनहाइये लोरक शुबद ( लोरककी एकान्तताका वर्णन ) माता पिता पन्धु¹ न भाई² । मग न साथी मीत न धाइ³ ॥१ इहँ पनगंट कइ पाव न आवइ । पा३ग परन मुख नीर चुआवइँ ॥२ दह दिपन जीउ भर भंगाग । पॉपनि भीमतारि गदि पाग ॥३ सपन यनक में फलु दगा । भिन नवैमारउँ मग्न पिगरा ॥४ काह उगाह पैसार गँभार । इहँ कथा फल दइँ⁵ ईंकार ॥५