चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८५ देखि पूछि तूं जो आहा, हौं कस गा बिसँभार ।६ रूपा एक मुख फेफर, मोर" लिय कछु न सँभार ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—राफ्तने सोरठ सुरखते खुद व पुरसीदने खुद रा (सोरठका जल- हाय अवस्थामे देखतासे प्रश्न) इस प्रतिमें पंक्ति ३ ४ ५ का क्रम ५ ३ ४ है। १—बहून (नागरी छोटे अक्षरोंमें 'बन्धु' भी) । २—बाद। ३— भाई। ४—आबा। ५—फोर्त। ६—भुआवा। ७—के। ८—सँभार। ९—भान। १०—को गहे। ११—मोरैं। १८३ (रीडंग्स १३९) जबाब बादने बुत बर सोरफ रा (देखताका उत्तर) एक अचम्भा सुनु तूं लोरा । सुतक सेतें भयउ जिहूँ तोरा ॥१ जहरिन्ह फेर मुण्ड इक आवा । सो तैं अहरिन्ह देख न पावा ॥२ हूँ तिहूँ देखि परा मुरझाइ । हौं रे पौन भर गएउँ बिलाइ ॥३ भा झंकार जो सिहूँ फोनों । डम्बर उठा बहुत गिय सोनों ॥४ खिन एकइस मबन तिहूँ कीन्हौं । फिर पयान उत्तर मुख दीन्हौं ॥५ सीस उघाइ जो देखउँ, मंदिर चहूँ दिसि सून ।६ सहन मोर जियैं उठरी, लोर तुम्हारे पून ॥७ टिप्पणी—(१) सुतक सेते—छोये हुए के समान । १८४ (रीडंग्स १४ ) तल्बीदने चाँदा बिरहपत रा व पुरसीदने हिकायत सोरफ (बिरहपतको बुलाकर चाँदका सोरठके सम्बन्धमें जिज्ञासा) चाँद पिरम्पत पास बुलाई। पिरम कह्रानी कहु मोहि आई ॥१ जिहूँ रग सफर पिरम बिमारें। रग डघरा हिरदै मरि भारूँ ॥२