चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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लोर सुरुज यह निरमल, तहँ सुवन उजियार ॥६ चाँद आहि घनि ठाकर, सुरुज नाँह हमार ॥७ टिप्पणी—(१) सरभर—समानता बराबरी। (४) पैसि—पैठ कर। कोलिसि—लिया। काहूँ—स्थान। अन्त—अन्य, किसी दूसरेको। (७) घनि—पत्नी। नाँह—पति। १८७ (रीकैण्ड्स १४३) बाज़ नमूने बिरहस्त हिराफ्ते लोरक पेश चांदा (बिरहपतका चाँदासे लोरकके प्रेमकी बात कहना) वह सो महर धिय तोर भिखारी। भीख लेइ जो देसु हँकारी ॥१ दरसन राता भयउ तिह जोगी। भीख न माँग पुरुख है मोगी ॥२ तिहि कारन मुख मसम चढ़ावा। बचन देहि तोहि सिघ पावा ॥३ तोरें रस कर आस पियासा। नित नहि आवै लै मरि सासा ॥४ चाँद बचन एक सुनु तुम्ह मोरा। तूँ औखद वह रोगिया तोरा ॥५ हस्त चढ़ा दिखरावतें, पुनि आनेहँ जेठनार।६ सोइ मड़ि महँ, देखत गा बिसँभार ॥७ टिप्पणी—(१) जो—यदि। देसु—दो। हँकारी—बुलाकर। (६) आनिहँ—ले आई। (७) गा—गया। १८८ (रीकैण्ड्स १४४) बपसरेह कर्दन चांदा अज बेहोशी लोरक दर कुलराना (मन्दिरमें लोरकके मूर्छित होने पर चाँदाका खेद) मड़ि मदिर सो लोरक अहा। हँ न बिरहपत मोसेतैं कहा ॥१ 'जुगुति जुगुति तिह जोग देतों। धिरत मिर बचन सुन सेंतों ॥२