चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४९ अबँहि जाइ घर माँह उँचावहु । पिरह बमूत मन पानि पियावहु ॥३ अस जनि कहि चाँद पठायउँ । पूछत कहसि चलि हों आयउँ ॥४ गहुँआ पानि नगर खंड लेहू । कै खंडवान बिरसपत देहूँ ॥५ मुख बभूत औ कत्था, अग कहु धरहु उतार ।६ दइ मयंत तुम्ह परसाँन, पूजहिँ आस तुम्हार ॥७ टिप्पणी—(१) तँ—तूने । मोसउँ—मुझसे । (२) सुगुति—(स युक्ति)—भोजन । सुगुति—युक्ति । जोग—योग्य । देवौं—देवी । (३) अबँहि—अभी । उचावहु—उठाओ । घरि—पकड़ कर । बमूत— भस्म । (४) जनि—मत । (५) गहुवा—पानी रखने का पात्र । खंडवान—खाँडका पानी शरबत । (७) परसाँन—प्रसन्न । १८९ ( रीछमहम १४५ ) चकरो बगदाद बिरसतादने चाँदा बिरसत रा बर कारह दर गुलदाना ( चाँदा बिरसपतरो कोरकके हाथ गाँड थार पान देकर भेजना ) चाँद खाँड दइ पान बिसारी । सुरंग बिरम्पत मद भिखारी ॥१ गाँव बिरम्पत मद पैठी । सहवों चाँद सुरुज भइ दीठी ॥२ बिरम्पत दसन पीजु चमकाये । मँधर रकत नैन झर लाये ॥३ बिरस्पत पाय गुरुज लँ रहा । तुम जो चाँद निरायन कहा ॥४ जागत रहँउँ जो नींद गपानी । अन न रूख औ भाइ न पानी ॥५ हों वा चाँद सँ आयउँ, कीन्ह महिँ परकास ।६ भयर नींन्द सुने, गइ रिंदार सिंह पास ॥७ टिप्पणी - (२) सहवां-जिस तरह । दीठी - याद दी । (४) निरायन-बिना भगवान्को वा ।