चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें० १९० (रीडिंग्स १८४) पन्द दाबने बिरस्पत चाँदा लोरक रा के दूर मुन विभासे बांग (बिरस्पतका चाँदकी ओरसे लोरक योगी वेश त्यागनेको कहना) अबहिं पुरुख मन राख रखावहू। बहुत चाँद सर दरसन पावहु ॥१ तजु लोर दरसन औ मढ़ी। सरग चाँद बिधि मगबन गढ़ी॥२ जो हर बसे तराइ भावइ। चाँद सुरुज फिरि ओर पठावइ ॥३ सो बचन सुनी लोरक भभुरा। दोउ पायँ सीस धर परा ॥४ बिरस्पत बचन लोर जो मानी। मैं सँहवान पियायसि आनी ॥५ प्रथम देउ मनायउँ, फुनि २ बिरस्पत तोहि ॥६ [ ] परौं लै तारा, चाँद मिलावहु मोहि ॥७ १९१ (रीडिंग्स १८०) पुन आवर्दन लोरक जिराले जोग व बेतानमे रसीद रखने लोरक व बिरस्पत (लोरका योगी बेस त्यागना। लोरक और बिरस्पतका अपने अपने घर जाना) सँबर दरसन जाग उतारा। मढ़ि तजि परै मंदिर सिधारा ॥१ चली बिरस्पत सुरुझ पठाइ। चाँद नारि कहुँ पात जनाई ॥२ चाँद बिरस्पत सउँ अस कहा। कहु मढ़ि सँबर कँवें अहा ॥३ नन रकत झरौं असराख्। सुगुति न जानी नींद अहारू ॥४ मिलन काम बिथा न सँभार। चाँद चाँद निसि ठाड़ि पुकार ॥५ मीन घुनत सिंह दिउ रैन, बनु नाउत अरुझाइ ।६ पद्म गुनत अपहाँहुत, आयउँ मदिर पठाइ ॥७ टिप्पणी—(४) भभुरा (पा भभुभाना) = मुँह का आग पर उकसहीत पडना।