भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१९१ १९२ (रौशनम १४८) भज महरा बेगानये आमदने लोरक ब पाय उफ्तादने मैना ( लोरकका घर आना और मैनाका पैर पर गिरना ) देबस दहाँ दिसि फिरि फिरि आवइ । चाँद लागि निसि रोइ निहावइ॥१ रिन एक सग साथ न पैसै । गया अमर बन मंदिरहि पैसै ॥२ मना आइ पाइ लै परी । लोरक बैसु कहूँ एक घरी ॥३ नहाइ धोइ बस्तर पहिराऊँ । औ घिसि चन्दन सीस फिराऊँ ॥४ सेज बिछाइ फूल पर डासा । पिरम लागि मन सान्त करासों ॥५ उतर न देहि प्रेम छल छूटा, सोइ नार बिललाइ ।६ साँ नहिं सुनै चँवर घर चिन्ता, रहा नैन दोइ लाइ ॥७ टिप्पणी-(१) दहाँदिसि -दसो दिशा । (३) कहूँ-कही। १९३ (रौशनम १४९) महरा गिरफ्तने लोरक अज कमाये रियाक चाँदा ( चाँदाके वियोगमें लोरकका बन-गमन ) रैन चाँद जा टेउ बयानाँ । मगेँ मरौं कँ दूबस तुलाना ॥१ चला धीर बनखण्ड जहाँ । सिंघ सिंदूर सँकारहिं वहाँ ॥२ मकर दिषम बन भम्भी भैषइ । रन आइ गामर महँ गँषइ ॥३ मङ्गु चाँदा रिन एक. म्म्रिगवइ । तिहिँ असरेनिम गामराँ आवइ॥४- मिरग पय रोइ लागे हायइ । पाउ धरत सुरु चाँदा आवइ ॥५ इँह पर रैन पुरावइ, आ दिन पुनि इँह भाँन ।६ चाँदा मनह पडगश, तिल एक हाइ न भाँन ॥७ टिप्पणी-(२) सिंघ सिंदूर - देखिए दि० टी० १७५।५ । (४) मगरी-आसन । (७) पडगश-पागल हुआ ।