चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 221, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें१९९ १९४ ( रीकेण्ड्स १५ ) बेकरार शुदने चाँदा सब कबाले इश्क लोरक ( लोरकके प्रेममें चाँदकी विकलता ) परी गनेझ सेज न भावइ । रैन चाँद बिइफइ झुपलावइ ॥१ कहु विहिँ सुरुज कवन पर बसा । मिख सर चढ़ा पीव मोर हसा ॥२ जहिँ कहुँ होइ सिंह आइ पुलाबहु । सुरुज आनि सेन बैसावहु ॥३ चाँद मरत लै सुरुज जियावइ । तू का करसि मोसें हुत आवइ ॥४ आनि विरस्पत सूंपा सरनाँ । रात देबस आइ मँह मरनाँ ॥५ अग दाइ मन चटपटी, घर बाहर न सुहाइ ।६ चाँद न जिये भानु बिनु, आनु बिरस्पत जाइ ॥७ टिप्पणी—(१) बिहफइ—बिहइ पाठ भी सम्भव है। दोनो ही निरस्पत (बृहस्पति) का देशज रूप है । (७) भानु—सूरज । यहाँ तात्पर्य लोरकसे है । भानु—से भानो । १९५ ( रीकेण्ड्स १५१ ) पेकन । दर बेकरारी चाँदा गोबर ( चाँदकी व्याकुलता ) हां निमि चाँद सुरुज कप पावडें । देबस होइ चढ़ि सरग मोलावउँ ॥१ पाँधे पँवर पँवरिया आगहिँ । तमकत पीर दड़ि डर भागहिँ ॥२ तो यहिँ कहाँ ईत पोसाऊ । रैन करैंट हिय उठे सताऊ ॥३ पाउम रात डगि अँधियारी । कितहुत सुरुज हँकारउँ नारी ॥४ जा मन रुचि माइ पियारा । भुरँग आंत किद्दि पाऊगुबारा ॥५ दसम भाग तुम्ह माधन, इहूँ जियं के आस ।६ चाँद सुरुज म पिगउप, पाँहु भाग बिलाम ॥७