भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४ १९८ (रीडिंग्स १५४) बुरदने बिरहस्त लोरक रा ब नमूढने राहे कस चाँदा (बिरहस्पतका चाँदके बौराहरका रास्ता दिखाना) जो सो बचन बिरस्पत कहा। लोर पीर हियें कै गहा ॥१ मन रहँसा कहु आजु मरावा। जिहलंग सूर मरग बइ पावा ॥२ बिरह झार अजहुत कुँमलानाँ। रहँसा कँवल भाँत बिहसाना ॥३ सो महि बाट आइ दिखराउ। जिहँ चड़ि आउँ चाँद कइ ठाउ ॥४ धनि सो रात जिहिँ मजन बुलाइँ। चाँद सुरुज दोइ गवन कराइ ॥५ चली बिरस्पत सरगहिँ, सुरुज गोइन लाइ। ६ जहाँ चाँद निसि बिसरइ, गई सो पँथ दिखराइ ॥७ टिप्पणी—(७) बिसरइ—बिश्राम करती है। १९९ (रीडिंग्स १५५) ख़रीदने लोरक अबरेशामे लाल बराय बाफ़्तने कमन्द (कमन्द बनानेके लिए लोरकका पाट खरीदना) पाट बघनियाँ लोर बिसाहा। परत सात गुन कीत बराहा ॥१ बन माँझ लोरक तस सानौँ। बानु सरग कइँ रची बिबानौँ ॥२ मुख माँग हुत सनु घर काड़ा। हाथ तीस एक आछँ ठाड़ा ॥३ अँहुरी मार गरेँ तिहिँ लाइ। जिहिँ सरि परि तिहँ पँखत न जाइ ॥४ उँड मँड राग फाँद सँचारी। बीर पाउ जिहिँ धरि धरै सँभारी ॥५ देखि पुष्ठि अस मैना, परहा करियहु काइ। ६ परी मँइल अठमारफ, बाँधे चाहत आइ ॥७ टिप्पणी—( ) बिसाहा—खरीदा। बराहा—बरहा मोटी रस्सी। (४) मार—मोड़ा। (७) मैइल—मैल।