भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१९५ २०० ( रीकेण्ड्स १५६ ) रवान शुदने लोरक दर शबे तारीका व बर शिगाल सूए कस चाँदा ( अँधेरी रातमें लोरकका चाँदेके पीराहरकी ओर जाना ) । छठ भादों निसि भइ अँधियारी । नैन न सूझे पाँइ पसारी ॥१ चला मीर घरहा गर लावा । जियकै धरै दूसरहिँ भुलावा ॥२ खिन गरजे फिर दइउ घरीसा । खोर भरे जर घाट न दीसा ॥३ दादुर रर्रहि बीजु चमकाई । अइस न जानु कौन दिसि जाई॥४ मसहूर दीख झरोखें पासा । लोर जानु नखत परगासा ॥५ चित भुलान बिसँभारा, मंदिर कौन दिसि आह ।६ देबस होत जा खित घरौँ, उतर कहूँ तो काह ॥७ टिप्पणी-(३) दइउ-दैव बादल । खोर-गाँवका कच्चा रास्ता । जर-जल । (४) दादुर-मेंढक । रर्रहि-टर्र टर्र करत है । अइस-ऐसा । (७) उतर-उत्तर दिशा । २०१ ( रीकेण्ड्स १५७ ) बरख्शीदने वर्क व शिनाख्तने लोरक खानए चांदा (बिजली चमकना और लोरकका चाँदाका आवास पहचानना ) काँधा लँके भा उबियारा । थिर भिया लौर मंदिर मनस्यारा ॥१ सँघरसि मीच केर पोमाऊ । मेलसि परह रोपि धरि पाऊ ॥२ परा परह तो चाँदा जागी । अँकुरी देखि धाँखण्टे लागो ॥३ झाँसा चाँद लोर तर आवा । अँकुरी काढ़ि परह झटकावा ॥४ जेठ अँउ मेलि मंदिर तर जाइ। हँसि हँसि चाँदा दइ झटकाई ॥५ एक वार परा तो, मेलो परह फिराइ ।६ कागै ठार अइस एक, जौ न मंदिर पर बाइ ॥७ टिप्पणी-(१) काँधा-चमका । लँके-बिजली ।

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