चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९५ (२) बासारू—पुरुषार्थ । मेलसि—फेंका । रापि—अड़ा करके । (४) झाँपा—झाँक कर देखना । तर (तल)—नीचे । (५) जइँ जइँ—ज्यों ज्यों । २०२ ( रीडँग्स १५८ : काधी ) अरभात कर्दने चाँदा बज बाज गुजाफ्तने कमन्द ( चाँदाका कमन्द छोड़ देने पर खद ) चाँद कहा अब लोरक नाहइ । मन उसरैं फुनि बहुरि न आइइ ॥१ हौं अस बोलेउँ चतुर सयानी । बरहा छोड़उँ कवन अपानी ॥२ हाथ क माँग समुँद मँह जाई । बहुरि¹ सो हाथ न चढ़े² आई ॥३ कइ औगुन सँसातें कें तोरा । परा परहँ³ पुनि होनै होरा ॥४ दई ठाउँ जो माँगा पाऊँ । मेठि बरह खाँभ लै लाऊँ ॥५ दइ बिधाता बिनवौं, सीस नाइ कर जोरि ।६ परा फाँद धन मोरैं, जाइ बरह जनि छोरि ॥७ पाठान्तर—काधी प्रति— दीगर रीडेण्ड्स प्रतिये समान ही केवल 'बज बाज' शब्द नहीं है। १—अन्तिम दो शब्द कुछ भिन्न हैं जो पढ़े नहीं जाते । २—शब्द भिन्न है जो पढ़ा नहीं जाता । ३—चढ़े म । ४—क ओगुन सें मैं गुन तोरा । ५—'बरह' शब्द नहीं है । ६—पंक्ति ६-७ नदारद हैं। टिप्पणी—(१) नाहइ—जायेगा । आइह—आवेगा । (२) अपानी—अज्ञानी । २०३ ( रीडंग्डस् १५९ ) कमन्द अन्दाफ्तने लोरक व रिहा कर्दने चाँदा दस्तून ( लोरकका कमन्द फेंकना और चाँदका उसे खम्भेस बाँधना ) घर भवा पठवरइ फिर आवा । दस मेलसि दस नक्षत्र ठनाबा ॥१ परा परह (तो) चाँदा पाई । जँकुरी मंदिर खाँभ लै छाई ॥२