चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९७ रहा परह लाएक धरि मानाँ। पान जुगुति सौं धरमि परानाँ ॥३ पीर पयान परन को कादा। पढ़िन बाँस चढ़न जनु आढ़ा ॥४ पाँचे टरि बार गा आई। मँज ममर हाइ पमरी जाइ ॥५ पड़ा नार घोंघहर, दरगमि विगम अगम ।६ निरग नियर घर भाँहट बँध न एऊ पाम ॥७ मूलपाठ- ——— । टिप्पणी-(१) बेर - बेर । अहा-कुआँ । बढ़-बढ़न । (४) बैरिय-नदी। (५) पमरी-फैली। (७) नियर-मकान की तरह। घर भाँहट-उलट दिया। बैठ- बैठेगा। २०५ ( हंसदूत ११ ) वा दूतह हम हाथ दे—यह तो न सुनाने सरकार पान व ( मान्धता कै दूत हस्तिनापुर भेजा । हस्तिबोधेका समाचार दूत ने कहा ) गाहब मत्त गाँव दरगौहीं। सो दरगमि जो डगा नारी ॥१ निंदा मारि गा गाँव दरहीं। अगहक थल पनाय्य कहँहीं ॥२ ईरित हार घर पग जाड़ा। मग्ग नगर जनु पाट छाड़ा ॥३ धरौं मार जा दरह परैहीं। जासु अराम समरथी रहीं ॥४ विमरा पाँत सहन्न महाँ। मानिक बार गहाड़ अहाँ ॥ इन हँसि जग निंदा जोरी ईंट पुजार ।५