चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९८ २०५ ( रीड्सबर्ग्स १४१; पंजाब [प ] ) सिस्ते नखशती चौरन्सी ( चौरण्डीकी चित्रसरीका वर्णन ) झार चौरुन्डी इगुर पानी । चित्र उरेह फीन्द सुनपानी ॥१ लंक उरेह भमीखन रेहा । सैंध मान दसगर र्क देहा ॥२ सीता हरन राम मंग्राऊँ । दुर पांडो कुरुखेत क ठाँऊँ ॥३ करपाँ पार कोइया सुभारू । अजपी नगरी अगिया बँतारू ॥४ साँझी पञ्चकाश्च भइ लावा । चक्रव्यूह अगिँ उथापा ॥५ सीह-सैंसूर मिरघ मिरपावन आनीं भाँत ।६ कपा-काथ परलोक निसारैंभ, लिख लीँयी जिहँ पाँत ॥७ पाठान्तर—पंजाब प्रति— शीर्षक—फट गया है । १—पूरी पंक्ति अस्पष्ट है पढा नहीं जाता । २—राउलदा (?) । ३—पंक्ति ६-७ अस्पष्ट हैं पढ़े नहीं जाते । टिप्पणी—(१) झार—पोतकर, रगड़कर । इंगुर—(सं हिङ्गुल>इङ्गुल>ईंगुर> इंगुर) एक प्रकारका लाल रंग जिसे अभ्रक पारद तथा गन्धक घोट कर बनाते हैं। स्त्रियाँ इसे अपना माँग भरनेके लिए सिन्दूरकी तरह काममें लाती हैं । बानी—(सं वर्णिक)-रंग । सुनबानी—सोनेका रेखांकन । इगुरी पृष्ठ भूमि पर सोनेसे रेखांकित चित्र चौदहवीं- पन्द्रहवीं शताब्दीमें काफी प्रचलित थे और उसके नमूने बड़ी मात्रामें चित्रित जैन ग्रन्थोंमें देखनेको मिलते हैं । (२) लंक—रावणका निवासस्थान । भमीखन—विभीषण । रेहा— रेखांकित किया । दसगर—दशकन्ध, रावण । (३) दुर—दुर्योधन । कुरुखेत—कुरुक्षेत्र, जहाँ महाभारत हुआ था । (४) इस पंक्तिम लोककथाओंमें प्रचलित पात्र जान पड़ते हैं किन्तु उनकी पहचान हम नहीं कर सके हैं । अगिया बैताल (अगिया बैतार)— विक्रमादित्यकी सिद्ध दो बैतालोंमेंसे एक । (५) चक्रव्यूह—चक्रव्यूह । (६) मिरखावन—मृगारण्य शिकारगाह । आनीं—अनेक प्रकारके ।