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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१९९ २०६ (रीडींग्स १६१) सिफ़ते खुश्बूए हर किस्से आरास्त: गोयद (प्रत्येक प्रकारकी सुगन्धिका वर्णन) लौटि देखि जो कुंकू लोरा। चन्दन घिसि मरि घरै कचोरा ॥१ बेर्ना परिमल इस औ छरा। ठौर ठौर पर सेडिया जरा ॥२ मेध सुगन्ध आइ असराऊ। चोवा पास होय मैंहकारू ॥३ खैर कपूर सुरंग सुपारी। पान अदा कर घरी सँवारी ॥४ नरियर दाख फिराँजी आहा। खाँड खँदोर कहूँ तिह काहा ॥५ लोरहिं लीन्ह खौम परछाईं, तुर उघाइ मुख जोइ ।६ धन बिरास चाँदा कैं, बास माँहिं निसि सोइ ॥७ टिप्पणी—( ) बेर्ना = ख बीरण, उस। परिमल—अनेक सुगन्धियोंको मिलाकर बनायी हुई सुगन्धि। इस—सम्भवतः इत्र। (३) मेध—मेद एक प्रकारकी सुगन्धि जो किसी पशुके नाभिस बनायी जाती थी। (आइन-अकबरी, आइन ३, पृ ८७)। चोवा—एक सुगन्धि जिसके तैयार करनेकी विधिका आइन अकबरीमें उल्लेख है। (४) कपूर—'केवर' पाठ भी सम्भव है। उस स्थितिम उसका तात्पर्य 'केवड़ा' होगा। २०७ (रीडींग्स १६१) सिफ़ते तख्त बरीं व मुकक्कल बे ज्याहिराते चिराग (शय्या वर्णन) पालँग सेब ओ आनि बिछाइ। धरत पाठ सुई लागे जाइ ॥१ पान बनै अरु फूलहिं भारी। सोनें झारी ढाँस गुंदारी ॥२ सुरंग चीर एक आन बिछावा। घरती पैंस झँपन अस आवा ॥३ सिद्धि धदि छत रखतें बिफगरा। खोंपा छूट छिटक गये भारा ॥४ यहि भैंति फरै फूल पहि पासी। फरेंकी धारि फूर भर दासी ॥५