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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२०० लोर जान आये समरि, पुहुप बास रस आइ ॥६ निसा हाथ पसारे, छाँपि उठे कर पाइ ॥७ टिप्पणी—(१) आधि—शकर । धरत—रखते ही। पाइ—पैर। धूर—भूमि । (३) सुरंग—लाल । अचँव—मूढ़ा । अस—ऐसा । (४) खोंवा—रेशमका जूड़ा। बाल—बाल केश । (५) काँड़ी—पुलकी टोकरी । कूर—कूड । २०८ ( रीडिंग्स १६० ) पैदाइ बदने लोरक चाँदा रा बज रजाब ( लोरकका चाँदाको जगाना ) गूँदवा गाँद परा मधकाई । दीन पतीसैं बैठे आई ॥१ मुखा कँवल जनु बिगसत आहा । अधर सुरंग बिरंगू फाहा ॥२ सोवत फिरा हियें कर धीरू । अपन देखि सुरँगि गा बीरू॥३ चितई गइँ अब आप जनाऊँ । पाइ धरउँ कै मकत सुनाऊँ ॥४ फिरि कै लोर झों अस आवा । मन संका नहि सोवत जगावा॥५ कापर जान भरपूर गहि, बीरहि यकति न आठ ।६ जीठ दान मन संका, किहि बिधि सोवत जगाउ ॥७ २०९ ( रीडिंग्स १६५ : पंजाब [क] ) बीदार शुदने चाँदा व गिरफ्तन मोये सरे लोरक व फरियाद बर आवर्दन ( चाँदाका जागकर लोरकके केस पकड़कर चिल्लाना ) ठहरत पेर गही कर भारी । नैन सांझहि मन आगि कुभारी ॥१ पुन खतरी आ नियरें आवा । कर गहि केस बाँद गुहरावा ॥२ बार बार कहि फेड न जागे । मानुस सुत सो गुहार न लागे ॥३