भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१२ २११ ( रीकैण्ड्स १५७ ) गुफ़्तनै चाँदा लोरक रा खुन्द ( चाँदा उत्तर ) लोर रैन जो घोरी आवइ । अमरन लेत तिन्हि कवन छुड़ावइ॥१ लोरहु नेह फइइ दुनि फाहा । अइस उतर कहु आइत आहा ॥२ मैं तिन्हको का संदेस पठावा । कौन सकति ऐं मो पहँ आवा ॥३ जा तिन्हिं पखि उठी जो आई । रहे न पाठ सो मरे उड़ाई ॥४ डिठ दइ पाहु आइ सो बेरा । नीन्द न फोठ लोर महिं हेरा ॥५ मींजु तार तूँ आनसि, फँसै मेट न जाइ ।६ पाठ धरहु तिहँ बिस्तर, लायहु जीठ गँवाइ ॥७ टिप्पणी—(१) मो—मुझ । २१२ ( रीकैण्डस १५८क ) सवाल करदने लोरक ब नमूदन तमसील ( लोरकका कथन ) जाँलहि जीठ घट महँ होई । तौलहि सरग न आवइ कोई ॥१ प्रथम मानुम जीउ गँवावइ । तो पाछैं थइ सरगहिं आवइ ॥२ मर कै चाँद सरग हौं आवा । जो डिठ होइ डराइ डरावा ॥३ हौं तो मरतें बिनहु सो देखी । तोहि देख धन मुएऊँ बिसोखी ॥४ सुर्ये जो मारे सो कस आहा । चाँद सुर्ये कर मारग काहा ॥५ देख रूप डिठ दीन्हों, तो आयउँ तिहिं पास ।६ रहे नैन तिहिं देखेवैं, रहे जीइ सें साँस ॥७ टिप्पणी—(१) जाँलहि—जब तक । तौलहि—तब तक । (२) पाछैं—पीछे, बादमें । (५) मारग—मारना ।