भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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९३ २१३ ( रीकेन्ह्स १६८५ ) गुवाश्तने चाँदा मुये खरे लोरक व गिरफ्तने कमरबन्दे ऊ ( चाँदाका केश छोड़कर काँचुक पकड़ना ) लोर मन उठा सरोहू । चाँदा चितईं भुझानेवँ कोहू ॥१ केस छाड़ि धनि आँचर गहा । चाँद बैठि नर ठाढ़ा रहा ॥२ धोर नाँव आपुन कहु मोही । बोल सबद मकु चीन्हों तोही ॥३ कउन जात तुर घर है कहाँ । कउन लोक तुम्ह आछ जहाँ ॥४ मता पिता तोरें चिन्त न करिहैँ । रैन फिरत तिहि धाघ न घरिहैँ ॥५ कहत बचन मईं अस भा, फारुहिँ फरियहुँ तोहि ।६ महर रोस लै फरहिँ, सर हत्या फुनि मोहि ॥७ टिप्पणी—(२) धनि—स्त्री । आँचर—आँचल । गहा—ग्रहण किया, पकड़ा । ठाढ़ा—खड़ा । (३) नाँव—नाम । (४) कउन—कौन । तुर—तेरा । आछ—रहते हो । (७) रोस—रोष क्रोध । २१४ ( रीकेन्ह्स १६९ ) जवाब दायने लोरक चाँदा रा ( चाँदाको लोरकका उत्तर ) आजु कहु चाँद न चीन्हसि मोही । गहनें लेत उपारेउँ तोही ॥१ तुम्हरे साख जो छीन्ह न काऊ । मारेउँ पीठ खदेरेउँ राऊ ॥२ आनों चीर देख तोर अह । सगरँ चीर मोर मुख चह ॥३ हौं सो आइ धनि कँकू तोरा । खाँड परत जँ अग न मोरा ॥४ महर काजि में जीउ निपारेउँ । गार पमेरू तहाँ रोह हारेउँ ॥५