चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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पुरुख न आपु सराहे, पूंछति कहइ मात ।६ चोर पोल सो मारै, जो मन बाउर रात ॥७
टिप्पणी—(१) बिगहसि—पहचानती हो । गहन—ग्रहण । उघारइँ—उद्धार रिया । (२) सान्ध—साथ । न्हेडैइँ—भगाया । (३) सगरै—सभी । (४) गार—गिरा । (७) बाउर—पागल । रात—अनुरक्त होकर ।
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( रीलैण्ड्स १० अ ) सखन करने चाँदा दर मेहानते लोरक ( चाँदाका लोरकका उपहास करना )
आपुहि बीर सराहसि काहा । आत गुवार आइ घरबाहा ॥१ इमरैं सेर सहस एक भाईहिँ । काज कहा नही तिह एक न छेबहिँ ॥२ अति फकान जो पूँछ बढ़ाबा । असबारहि कहँ फेरि न आवा ॥३ जाकहँ छोर कीन्हि मिताई । सिंह के मंदिर कस पैठेउ धाइ ॥४ ऐसें नर जो सेउ करावइ । साईं दोइ अस छोइ न आवइ ॥५ सुन सो पावइ महर अस, गोवरा परिहँइँ बेरि ।६ एक घरति सो मरि पहँ, तूँ डोलहु किह फेरि ॥७
टिप्पणी—(१) गुवार—ग्वाल । आइ—हो । (७) परिहँइँ—देँगी । बेरि—बेड़ी ।
२१६
( रीलैण्ड्स १ ब ) जवाब दादने लोरक बर चाँदा रा ( लोरकका उत्तर )
साईं दोइ अस बोलैं नारी । रात आइ अहनाहूँ मारी ॥१ कै पायन बिरुवार सँचारै । कै दिनाय पूनों महँ सारै ॥२