भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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९६ 'करिया' शब्द है। पतवारवाहक का काम नावको नदी के बीच सम्हाले रहना है। नावको किनारे से रस्सी खींचनेवाला माँझी ही होता है। अतः प्रस्तुत प्रसंग मे उचित पाठ 'गुनधार' होगा 'कँडहार' नहीं। २१८ (रैडिंग्स १०१ब) जवाब दादन लोरक चाँदा रा ( लोरकका उत्तर ) जिहँ दिन चाँद गयउँ जेउनारा। देख बिमाहेउँ रूप तुम्हारा ॥१ तुम्हरे जोत भयउ उजियारा। परेउँ पतंग होइ मैं बिसमौँरा ॥२ सो रंग रहा न चित हुत जाइ। जिसहिँ माँझ रंग गड़िया छाई ॥३ रंग जेउँ रंग भोजन करउँ। रंग बिन जियउँ न रंग बिन मरउँ ॥४ तिहि रंग नैन नीर नइ पहा। बिनु सच घूड़ होइ अवगाहा ॥५ रंग जो देहि मन मारी, बिन रंग उठे न पाउ ।६ जीउ पाइ रंग डोलहि, सुन चाँदा सचभाउ ॥७ २१९ (रैडिंग्स ११८ब) गुफ्तने चाँदा हिकायते इश्क (चाँदा प्रेमकी बात कहना) रंग क बात कहउँ सुनु लोरा। कैसें रात मोह मन चोरा ॥१ जात अहीर रंग आइ न तोही। रंग बिनु निरग न राता होई ॥२ कहु दुख जो तैं सम निस सहा। बिन दुख यह रंग कैसे रहा ॥४ धो न दिप नर राँडइ घाऊ। रंग रत एक होइ न फाडू ॥४ अगिन झार बिनु रंग न हाइ। जिहि रंग होइ आवत मर साइ ॥५ अन न रूप रंग पड़ा, बाइ नींद निसि जाग ।६ मात पूत तूँ लारक, कहु कैसें रंग लाग ॥७