चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०७ २२० ( रीड्स १०२ब ) जवाब दादन लोरक चाँदा रा ( लोरकका चाँदको उत्तर ) मान भयेउँ चाँदा तिहि जोगू । सर दइ खेलेउँ चित घर मोगू ॥१ काट गहेउँ अस सोवा सारी । खांढ पेम दोइ कीन्हेउँ मारी ॥२ आविस फादि कीन्ह दोई आधा । आवसु चाँद में आपुहि साधा ॥३ पिरह दगध हौं वो तों कीन्हा । जरत नीर तिइ ऊपर दीन्हा ॥४ अन छाड़तँ बिरह कँ झारा । पानी के हौं रहेउँ अधारा ॥५ कहैं धिरत सब आपन, आप जो पूछहु पास ।६ अधर घर के पेरें, तिहि रंग बारें रात ॥७ २२१ ( रीड्स १०३अ ) गुफ्तने चाँदा हिकायते मैना बा लोरक ( चाँदका लोरकसे मैनाकी प्रार्थना ) सुरग सेज मरि फूल बिछावसि । फेँवल फली तस मना रावसि ॥१ अस घनि छाड़ जो अनतँ धावा । किये सनेह तो हँइ छुटकारा ॥२ भँवर फूल पर रहइ लुभाइ । रमल बाकहि फिरि नहि जाइ ॥३ काइ लाग तूँ कुवरी करमी । सनेह के लिलार फूँट न धरमी ॥४ अरे लोर हूँ फिरँ परावमु । तिहँ पराउ जहाँ कछु पावसु ॥५ का अछत हाँ पाउडर, कें तू लोर धोरायसि ।६ कें सनेह महँ झरँबयस, जिग भावइ तित जायसि ॥७ टिप्पणी-(१) अनतँ—अन्यत्र । (३) बाकहिं—दशन । फिरि—लौटकर । (५) परावमु—भुलावा देता है; बहकाता है। पराउ—दरवाजा ।