भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१८ २२२ ( रौङ्गस १०३५ ) जवाब दादने लोरक चाँदा रा ( लोरकस चाँदाको उत्तर ) जिहँ दिन चाँद देखो फङ्गा । तिह दिन देखि तोर रंग चढ़ा ॥१ (बिसरा लोग कुटुँब घर बारा) । बिसरा अरथ दरब मोबारा ॥२ सुख तँबोल सिर तेल बिसारा । बिसरा परिमल फूल कँ हारा ॥३ अन न रूख निसि नीद बिसारी । बिसरी सेज सफ़ल फुलवारी ॥४ बुध बिसरी रंग भयलैं समाइ । ताकहँ न रंग गड़े माराइ ॥५ नेह तोरें रग पुरावा, हिरईं लागेउँ आइ ।६ कूहष सरग भइ धरती, जे सर बाइ तो बाइ ॥७ मूलपाठ—(२) बिसरा लोग कुटुँब घर बार निथारा । २२३ ( रौङ्गस १०३७ ) गुफ़्तन चाँदा हिकायते इश्के खुद बर लोरक रा ( चाँदाका लोरकस अपने प्रेमकी बात कहना ) जिहि दिन सारक रन मिति आयहु । पैठि नगर धाइ दिखरायहु ॥१ तिह दिन हुत मैं अन न करायी । परी न नीदु सेज न सुहाई ॥२ पेट पैसि जिठ लीन्हा फाड़ी । बिनु सीठ नारि बीउ बर ठाड़ी ॥३ मैं तुम्ह लाग बेठनार कराइ । अंतस फरी पिवहिं हँकराइ ॥४ महु तुम्ह एक टक देखैं पायेउँ । देख रूप मुख नैन सराहेउँ ॥५ तिहि दिन हुत हौं भूखेउँ, मोर जीउ तुम्हकौं भानु ।६ चिर बिथा पिरम तुम्हारा, तोर धुनि करियहि फाडु ॥७