चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०१ २२४ ( रोसिएड्स १०३ ब ) बैसियत दर पन्वह व आगे शब गुजरानीदन ( हँसी मजारमें रात बिताना ) अमरित पचन चाँठ अनुसारा । हँसा लोर भा घोल अपारा ॥१ हँसि कै लार धीर कर गहा । मोतिह हार टूटि कै रहा ॥२ चौं कहा जिन एफ मँभारहु । हार त्रुटि गा मोतिह सँभारहु ॥३ पीनि मोति भय चीर उठावहु । तों चढ़ि मेज पिरम रस रानहु ॥४ मोति उठावत रैन बिहानी । उठा सुर पै साध न मानी ॥५ बीर टरान भार भा, मन कै चेख गँवाउ ।६ मेज इठ लै धौंदै, सूरज दिवस लुफाउ ॥७ टिप्पणी—(७) इठ—नाचे । ( सम्भव है यहाँ कुछ और कड़वक रहे हो ) २२५ ( रोसिएड्स १०५ ) मुबामबत कर्दने तरफ बा चॉदा ( लोरक-चाँदाका प्रणय ) गिन एक हाय पाय सँग आये । पुन रे भिर दुहुँ हींउर लाये ॥१ यदि सुहाग दइ दूसर घर । सूझे ऊठि जनु सोंगे भिर ॥२ अधर अधर कर कर गह । नाभी नाँद भा बान रह ॥३ जाँग आर तन पैं नै राय । अनु गप मयन परकहुँ आय ॥४ काम सुतृति रस पहि जिमि आई । पुनरुइ बहुत अपरप न भय ॥५ चाँद धरटि सूरज आधा, रैन समासी हाइ ।६ पाँचभूत आत्मा मिलन, अस पिरमा मद फाह ॥७ १४