भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१ २२६ ( रीफ्रेंस १०६ ) बस्ते सुबह गाना कर्ने चाँदा लोरक बा बेर एकत ( प्राताकाल चाँदका लोरकको सीसराने भींचे उठाना ) केलि करत सब रैन बिहानी । देख घर धनि उठी डरानी ॥१ जाँलहि चेरी उठै न पावा । साँलहि चाँदै सुरुज लुकावा ॥२ मन सँउ आपुन नाहीं लोरा । मत कुछ होइ सुल टर तोरा ॥३ मत कोइ चेरी देख पावा । जाइ महर पहँ बात जनावा ॥४ जो कोइ तिहको देख आई । हाँ पुन मरों तोहु बिख खाई ॥५ पिरम खेलैँ सो कर साहस, सो तरि लागे पार ।६ माँझ समुद होइ थाके, तीर लाउ करतार ॥७ २२७ ( रीफ्रेंस १०० ) आब आवदने कनीज़गान व रूये चाँदा शुस्तन व आमदने सहैलियान ( दासियोंका पानी लाकर चाँदका मुँह धुलाना ; सहेलियोंका आना ) भोर चेरि पानी लै आयीं । मुख धोवा और सखी बुलायीं ॥१ फेंफर मुख निसि चाँद न सोभा । चीर फाट कहुवाँ सइ गाभा ॥२ फिरी माँग केस उधियानी । फूल झरि मरि रही कुम्लानी ॥३ सखिहँ देखि दो बातें अइसे । तोर चाँद कर आँगी कैसे ॥४ भये अनन्द लोयन रतनारी । रंग रस तंबोल पियारी ॥५ चोली चीर सँवारहु, सीस सिन्दूरहु माँग ।६ भँवर फूल पर बैठो, लाग दीख तिइ ऑँग ॥७ २२८ ( रीफ्रेंस १०८ ) बज़म दादन चाँदा मर सहैलियान अज़ बहाना ( चाँदका सहेलियोंसे बहाना करना ) चाँद सहलिन सा अस कहा । एकउ चेरि न जागत रहा ॥१