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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२११ रैन चौखण्डी चढ़िइ बिरारी । लै ऊँदर घुस गा बिलारी ॥२ ऊपर परी सोह मैं जागा । नखथन लाग चीर फुनि भागा ॥३ तोइ हुसें मोर नींद उड़ानी । इत फुनि जागत रैन बिहानी ॥४ हाथ पाँव में सर न सँभारा । फिरी माँग सीस औ पारा ॥५ तिह गुन नैन रात मोर, मुख फेंकर कुँबलान ।६ आइस रात मैंइ दमर, मंदिर न फोरु सान ॥७ टिप्पणी—(२) बिरारी—बिलारी बिल्ली। ऊँदर—(सं उन्दुर)—चूहा। बिलारी— बिछौना। (३) सम—खान । २२९ ( रीडंग्स १०९ ) रफ़्तने बिरस्पत बर महरि ब कैफियते गिरिया उफ्तादन साज नमूदून ( बिरस्पतका महरिको चाँदके डर जानेकी सूचना देना ) जाइ बिरस्पत महरि जुहारी । कइ जुहारि फुनि पात उमारी ॥१ रैन डरानी चाँद डुलारी । बिसथै ऊपर परी मँझारी ॥२ चीर फाट मुख गा कुँभलाइ । चाँद चितहि मैंह बहुत लजाई ॥३ जेगें सोइ भा अँधियारा । जागत चाँद भयउ भिनसारा ॥४ अन न रूच औ माठ न पानी । फूल घाम वस चाँद सुखानी ॥५ चला महरि कुछ देखउ, औ कुछ धरहु उत्तारि ।६ सोवत बैस झरँकी, अस भई चाँदा नारि ॥७ टिप्पणी—(२) बिसथ—बिस्तर । मँझारी (सं० माजारी)—बिल्ली । (४) भिनसारा—प्रातःकाल । २३० ( रीडंग्स १८ ) आमदने मादरो पिदरे ब दर दास्तान चाँदा खुद रा ( चाँदके माता पिताका आना : चाँदका सोनेका बहाना करना ) माता पिता लोग जन आवा । कुँवरि चाँदहि मुख ढरसावा ॥१ एक अपुहि अस अगरग लायसु । औ तिह ऊपर सुरुज लुकायसु ॥२