भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१४ हँसि लोर अस बोला, राधा रात भुझायउँ ।६ कौतुक रैन बिहानि, तिह देखत नैन न लायउँ ॥७ २३७ (रीडिंग्स १८५) खबर याफ़्तने मादरौ पिदरे चाँदा अज आमदने कसी बीगाना दर कफ़ (परपुरुषके महकमें आनेकी बात चाँदाके माता-पिताको ज्ञात होना) महरी महर पासँ अस जाहा । मदिर पुरुख एक आवहि आहा ॥१ घेरी घेर नाथ औ भारी । तिह सुन पुर घर बात सँधारी ॥२ गोवरौ मात घना फुनि मयी । और कुछ मैनाँ पँह फुनि गयी ॥३ फूल घाम बस रही सुखाई । फुनि मैना गइ कुँभलाई ॥४ घर घर महरी खीस कड़ही । सुन कै अगरग धिसैंहिन बरहीँ ॥५ मालिन कङ्गा लोर करैई, रोवत मैना जाइ ।६ आग लाग सुन बिस्तर, बरतें जाइ बुझाई ॥७ २३६ (रीडिंग्स १८६) पुरसीदन रोसिन मर मैनाँ रा अज बगीदरे हाले ऊ (रोसिनका मैनासे चमककर तबीयत खराब होनेका कारण पूछना) रोसिन मैनाहि देखतें अहा । कहसि तिह कुरषी कैं कछु कहा ॥१ चरन रात साँवर तोर फाबँ । चरन सँवर रात होइ चाबै ॥२ मैंह कहु सुनी कछु तँ बाबा । लोर बीर भयउ किंवा राबा ॥३ बारी उतर बेस न मोही । कै कुछ आइ कहा है तोही ॥४ जीभ काढ़ि ताकर हीं खारीँ । परहिँ छुड़ाइ तिह देस निसारौं ॥५ ठरघ फाट हाँ मरिहतँ, कहसि तिह बेदन फाइ ।६ सुंदर रूप तोर, भोर बदरी ढाँकत आइ ॥७