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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१५ २३७ ( रीसैन्ड्स १८७८ ) मुनफ़िर शुदने श्लोबिन बह मन रीच नमीदानम ( श्लोभिका अपनी अनभिज्ञता प्रकट करना ) ओही पोइ मोर मानी हो[ऊ*]। मँह आगि जो कहि कुछ कोऊ ॥१ हाँ दोखी जो कछु न जानाँ। अनजाने कम काह पखानाँ ॥२ दई ठाँठ भल बार न पाऊँ। जान मुनि जिह जो तोहि झुकाऊँ ॥३ सो कम आइ राँड भैंठहाइ । सेज छाँड़ि जो आने जाइ ॥४ घर कें धिय कीन्हि पराइ । अपने कीतस आन घुराइ ॥५ ताहि लाग जिठ धाँधउँ, जीउ मोर सूँ आहि ।६ कड़मि तिह कान महहाइ, देस निसारउँ ताहि ॥७ २३८ ( रीकंग्रह्म १८७९ ) बाज गुफ़्तन मैनों बर श्लोबिन रा ( श्लोभिनसे मैनाका कथन ) माइ मोर तुम माम न डोहू। बोलेउँ चितहि उठा जो कोहू ॥१ साकर नित उठि पाठ गुहाराँ। ताकर ओछ कहे का पारी ॥२ कडु बियाइ पारी हों आनीं । साँसहि न माँगहि गहउँ न पानी॥३ मँवर पास कूँवरी कें राता। कँवल कली इन पूछि न बाता ॥४ अमरित कुण्ड ओ आछत मरा। सो सरवर लै अनसँ धरा ॥५ बाइ दखु माइ खोलिन, लोरक हूँ सत डल ।६ सारस बर रर मराँ, पिउ बिन रैन अकेल ॥७ टिप्पणी—(७) सारसकी जोडीका प्रेम प्रसिद्ध है। एककी मृत्यु हो जान पर दूसरा भी उसके वियोगमें झिसक झिसककर प्राण दे देता है।

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