भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१५ २३९ (रीडिंग्स १८८क) जवाब दादन लोकिन मर मैना रा (मैनाका लोरिकका उत्तर) रोस न आइ होइ हरुवाइ । हिरदै घात आइ गरुवाइ ॥१ हिरदै घोल भार सह लीजा । हिरदै कहुँ खीउ गरू न कीजा ॥२ हिरद होइ पुछ केर उठानां । हिरद नसैनी फङ्गा सयानां ॥३ हिरद मों भूँख न जाइ अदाभी । पाउ न खोल जिंह चित गरुआभी ॥४ गरुवइ होइ घर अपनें रहठ । अस हिरवैं कहूँ चिन्त न करहु ॥५ आनेठँ बात गुन आगर, मैना न कीजइ फोइ ।६ गारु फार दोइ जीभ उपारो, तू लोरक कर आइ ॥७ २४० (रीडिंग्स १८८ख : काछी) तक़रीर कदने लोरिन मर मैना रा (लोरिकका मैनासे कथन) बारि बियाहि जो तैं हुत आनी । बीर बाँधि क दीन्ह उसानी¹ ॥१ गुन खोर² धन नाव चढ़ाई । तिहँ न कन्त कौ कोउ पतियाई³ ॥२ यह मेरौँ कम होइ हियारी । लेसु फाटि कै गुनँ अनारी ॥३ लागइ आग सेब दिन मोरी । छोड़ सुरुज रँगइ निसि चोरी⁴ ॥४ जोइ सुरुज चाँद पहँ आवा । सरग तराइन भइँ दिखरावा ॥५ लाज मयौँ तिहिँ साँवर, बइस रात अँधियार ।६ नीरस चाँद मुख फारी, रात भरें उजिआर ॥७ पाठान्तर—काछी प्रति । शीर्षक—जवाब दादन मैना लोरिन रा (मैनाका लोरिकको जवाब) १—बारि बिवाहि मूँ को रानी । बीर बाँज औ नाव कहाती ॥ २—गुन जो खोर । ३—तिह पग तह को पूँछिया । ४—[--] काट कहत गुनें