चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१९ २४५ (रीसेन्ट्स १९३) ब आमदने मादर लोरक व आश्ती कदन मियाने लोरक व मैना ( लोरककी माँका आकर लोरक-मैनामें सुलह कराना ) सुन खरभर खोलिन तस धाइ । जस मगिरथ यह छगिन आयी ॥१ लोरइ अजफर पकसि न आवा । अबहूँ इहँ भव फही फहावा ॥२ केस गही गर माथ ओनायसि । कुचछाल दुहुँ गालहि आयसि ॥३ वास्त्र चेरि पियावहिं पानी । साकर घिय चेरी फहूँ आनी ॥४ आँ विह ऊपर बरस अँङ्गारा । दहि दहि कोयला भइ सो नारा ॥५ आग लाइ घर अपने, लोर दहाँ दिसि धावहु ।६ बेग धँस जर मैनाँ, अमरित छिड़क बुझावहु ॥७ २४६ ( रीसेन्ट्स १९४ ) आश्ती कदन लोरक बा मैना बज गुफ्तार मादर ( माँके कहने पर लोरक-मैनाका सुलह करना ) लोरक हरकि खोलिन घर आइ । धीर नारि फेंट लाइ मनाइ ॥१ सुआ छलि धनि सेज सँमारे । पान फीरें मुख दीनि सँधार ॥२ रँग बिनु पान खियायसि मोही । मा रँग इहँ न देखउँ तोही ॥३ रंग बिनु पातहिं भाउ बनाया । तुम लोरक रंग अनतँ आवा ॥४ घर हर आगि मैना जरौं । चित मन घाउड पाँड़ौँ जरौं ॥५ मज न भाउ रुचि न कामिनि, आ न हाइ मन हाथ ।६ सो मैं नैन न ढरूँ, तिल न रहूँ संग साथ ॥७