चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२१ २४९ (रीड्सण्ड्स १९५क) नूहू। दर खुशदिली लोरक व मैना गोयद (वही: लोरक और मैना की प्रसन्नता का वर्णन) बैठि सान्त हँसि लोरक कहा । कासो कोप मैना चित अहा ॥१ घर ठमर कै मंदिर सँवारा । कीत रसोइ अगिन परजारा ॥२ सेब पिछाइ लोर अन्हवावा । औ भल भोजन फाड़ि जिंवावा ॥३ रंग बिरंग सो लीन्हि सुपारी । पान बीरें मुख दीन्हि सँबारी ॥४ हँसत लोर बाहर नीसरा । चाँद पात मैना बीसरा ॥५ सोइ बिरख सोइ तरुवर, सोई लोर सो मीर ।६ सोइ मिरघ सो थरहर, सोइ अहेरिया सो अहेर ॥७ २५० (रीड्सण्ड्स १९०) कैफियते चाँदा तराउशत दर बुतखाना गुफ्तन महत (मन्दिर में चाँदा ब्राह्मन का कहना) असाइ असाढ़ी गयी तिह अही । दूज गिन देउ चातरा कही ॥१ सोमवार महत गिन कहा । सो दिन आगैं आवत अहा ॥२ होम जाप अगियार करावहु । परस देउ कर जोरि मनावहु ॥३ सो घरि माँथ देउ पाँ आवइ । सो बस चाँद सुरुज बर पावइ ॥४ सोमनाथ कहँ पूजा कीजइ । अखय फूल मार लै दीजइ ॥५ पते पिरथिमी नौखण्ड, देउ आव सुन आइ ।६ चाँद सुरुज मन रहँसे, देउ मनायस [आइ*] ॥७ टिप्पणी—(१) चातरा—यात्रा देवता की पूजा (मनौती) के निमित्त जाना । (३) होम—हवन। जाप—जप। अगियार—धूप अथवा घी शक्कर को अग्नि में डाल देवता के सम्मुख आरती की भाँति फिरना ।