चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२४ २५३ ( रीकह्म्स २ ) रफ्तन चाँदा बरूये मुफ़साना व आशिक शुदने बेजान दीदने चाँदा (चाँदा मन्दिरमें प्रवेश : उसपर देवताओँका आसक्त होना) हाथ सिंघोरा सेंदुर भरा । भीतर मंदिर चाँद पाँ धरा ॥१ सखीं साथ एकगोहन भयी । नावत सीस देउ पह गयी ॥२ देउ दिस्टि चाँदा मुख लागे । मुष बिसरी आँसिष फुनि मागे ॥३ देखत देउ गयउ मुरझाइ । चाँद घराइन सों चल आइ ॥४ के बिधि मोहि मोह जो दीन्हा । क हौं सरग मंदिर महँ कीन्हा ॥५ मंदिर तराइन भरि गा, चाँद कियउ अजोर ।६ होम जाप सब बिसरा, कवन देवस यह मोर ॥७ टिप्पणी—(१) सिंघोरा—सिन्दूर रखनेका पात्र। विवाहित हिन्दू स्त्रियाँ देवार्चन पूजा आदि अवसरों पर इसे अपने साथ रखती रही हैं। (२) नावत—'ठाट' पाठ भी सम्भव है। २५४ ( रीकह्म्स ३ । ) परस्तीदने चाँदा बुत रा व खास्तने मुहब्बत बा लोरक ( चाँदाका देवतकी पूजा करना और लोरकका प्रेम माँगना ) सेंदुर छिरुक अगर चढ़ावा । नमस्कार कै देउ मनावा ॥१ सोवन अगरत फूल कै माला । पायँन्ह लागि बिनवइ अमनाला ॥२ दव पूजि माँगिउँ तुम्ह पासा । मठ करु मन पूँजइ आसा ॥३ चाँद सुरुज बर बिहँ पाऊँ । दउ करम महँ पिरत भराऊँ ॥४ बिनवइ चाँदा पाँपन परी । दउगुरुज बिनु जीउ न घरी ॥५ एक पहरु कै महँ हर, बिछी राँध बुझाइ ।६ दउ पूजि क चाँदा, बिनती ठाड़ि कराइ ॥७