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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२२५ टिप्पणी—(४) देउ करस महँ फिरत मराऊं—मनोरथ पूर्ण होनेके निमित्त धूप घी अथवा तीर्थ रूपसे देउ करस भरनेकी मनौती (मान्यता) प्रायः स्त्रियाँ मानती हैं। २५५ (रीडिंग्स २१) आम्दने मैना व मुनिदयान खुद दर बुतखाना व परस्तीन्दने बेष रा (मैनाका सहेलियोंके साथ मंदिर आना और पूजा करना) चढ़ी पालकी मैनाँ रानी। सखी सात सौ आइ भुलानी ॥१ सोक संताप बिरह कै मारी। किसन बरन मुख रीसा नारी ॥२ झुर मून (अरु) सीस अति रूखा। मुक्ता कंचन कंदरप झर सूखा ॥३ बहुल उदग उघाट सतायी। पूजा देउ चदामसु आयी ॥४ अखत फूल दीन्हि कर फाड़ी। देउ परांवर उतर भइ ठाढ़ी ॥५ अहो देउ तिह फहा यह, जो बर मरकह राउ ।६ अपने सेज छाड़ि निस अनतँ, फिर फिर घाउ ॥७ मूलपाठ—(१) अम्मर। टिप्पणी—(१) झुर—मूँड सर। २५६ (रीडिंग्स २१) पुरसीदने बाँदी बर मैना रा अज दिल्लगी हाये ऊ (बाँदीका मैनासे उदासीका कारण पूछना) हँस कै बाँदि मैनाँ पूछी। कै सुरँगहुत आमहु छुछी ॥१ अति दो मन आँ साँवर भानूँ। सीस न चंदन अधर न पानूँ ॥२ कै साइ निसि सेज न आवइ। तिहिं संताप दुख रोइ बढ़ावइ ॥३ कै तिह नारि आइ मुष चोरी। तिह अवगुन पीठ लावइ खोगी ॥४ कै तुम्ह करहु न अरप सिंगारू। कै सुहाग दै ढूँव पीरू ॥५ १५

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