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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२२२ २५१ ( रीकैन्ह्स १९८ ) रवान शुदने औरतहाने शहर ब आम बराय परस्तीदन देवता ( देउपूजाके लिए प्रत्येक वर्गकी स्त्रियोंका जाना ) टाँकनि खतरिन बाँभनि मिलीं । बैस डगरिन भाटिन चलीं ॥१ चौहानिन पुनि पहिर पटोरा । गवन करन जनु समुँद हिलोरा ॥२ कर सिंगार पहुइनि नीसरीं । कैंथिन दिबानि औ गूँजरी ॥३ चमकत निकरीं रूप सोनारी । निकरीं मालिन औ फलवारिन ॥४ चली बेसवाँ आनों भाँती । परमा पौन सो पावहिं पाँती ॥५ धला महर फर गोयर, देस परा बहु रोर ।६ सोमनाथ कइ पूजहुँ, सेंदुर फूल बटोर ॥७ टिप्पणी—(१) टाँकनि—टाँक देशकी निवासिनी पंचांगिनी। खतरिन—खत्री अथवा क्षत्री जातिकी स्त्री। बाँभनि—ब्राह्मणी। बैस—वैश्य। डगरिन—उस वर्गकी स्त्री जिसका पेशा प्रसूतिकाकी सेवा करना बच्चेका नाल काटना गुदना गोदना आदि है। भाटिन—भाट (चारण) जातिकी स्त्री। (२) चौहानिन—चौहान (क्षत्रिय जातिका एक अंग) की स्त्री। (३) पहुइनि—पहुना अथवा पहुइरा जातिकी स्त्री। कैंथिन—कायस्थ स्त्री। दिबानि—दीवान (अधिकारी) वर्गकी स्त्रियों। गूँजरी—(गुर्जरी), अहीरनी, दूध बेचनेवाली। (४) सोनारी—सुनारिन। फलवारिन—कलवार नामक जातिकी स्त्री। (मुख्यतः शराबका काम करनेवाला वग कलवार कहा जाता था।) (५) बेसवाँ—वेश्याएँ। (६) रोर—शोर। २५२ ( रीकैन्ह्स १९९ ) तलबौदन चाँदा सहेलियान रा ब रवान कर्दन सुये बुतखाना ( सहेलियोंको बुलाकर चाँदाका मन्दिर जाना ) पाँच सहेलिन सबै बुलायी । सरग इतै जनु अछरिन्ह आयीं ॥१

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