भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२२७ टिप्पणी—(४) देउ करत महँ फिरत मराऊं—मनोरथ पूर्ण होनेके निमित्त वृक्ष की अथवा तीर्थ जलसे देव करन भरनेकी मनौती (मान्यता) प्रायः स्त्रियाँ मानती हैं। २५५ (रीकैण्ड्स ३३) आमदने मैना ब मुनिश्यान खुद दर बुतखाना व परस्तीदने देव रा (मैनाका सहेलियोंके साथ मंदिर आना और पूजा करना) चढ़ी पालकी मैनाँ रानी। सखी सात सौं आइ तुलानी ॥१ सोक सँताप बिरह कै जारी। किसन बरन मुख रीसा नारी ॥२ मुरसन (अरु) सीस अति रूखा। सुखा कवल कँदरप झर सूखा ॥३ बहुत उदेग उघाट सतामी। पूजा देउ चढ़ायसु आमी ॥४ अक्षत फूल दीन्हि कर काढ़ी। देउ परावर उतर भइ ठाढ़ी ॥५ अहो देउ तिह फहा यह, जो बर बरकइँ राउ। ६ अपने सेज छाड़ि निस भनतैं, फिर फिर धाउ ॥७ मूलपाठ—(३) कसर । टिप्पणी—(३) सुर—मूँड सर । २५६ (रीकैण्ड्स ३४) पुरसीदने चौंदा मर मैना रा अज शिकस्तगी हाले ऊ (चाँदका मैनासे उदासीका कारण पूछना) हँस कै चाँदे मैनाँ पूछी। कै सुरँहुत आयसु छूछी ॥१ अति दो मन औ साँभर पानीं। सीस न बेदन अधर न पानीं ॥२ कै साइ निसि सेज न आपइ । तिहिं सताप दुख रोइ पहाबइ ॥३ कै तिह नारि आइ मुघ थोरी । तिइ अपगुन पिउ लायइ खोरी ॥४ कै तुम्ह करहु न भरप सिंगारू। कै सुहाग मैं हूँव पीरू ॥५ १५ 1