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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२२६ विंहि बस विरी न देरोठ, फौन खोर सो आइ ।६ के सगाइ काहू सों, अपजस सोइ (घड़ाइ) ॥७ मूलपाठ—(७) घठाउ । टिप्पणी—(१) सुरेहुत—देवताके निकट । एणी—रानी । (२) वेदन—वेदी गिन्ती, वीरा । (४) खोर—गाँवरा कच्चा रास्ता; गली । २५७ (रौतैनूस २७ : पंजाब [प]) जबान दादने मैना मर चाँदा रा (चाँदको मैनाका उत्तर) सुनु न चाँद एक उतर हमारा¹। नाँह लीन्ह विहि परा खमारा² ॥१ नाँह लीन्ह महँ परा खमार³। काकहि फरैहीं⁴ अरप सिंगारू ॥२ हँसि हँसि बात कहौ बिगराई । विनु एक सैं न देखु छझाईं⁵ ॥३ विह खखोर⁶ विह दोख नै आवहि। सती वै परपुरुख राँवैहि⁷ ॥४ अप छिनार और किहू कहा। सो कस चाँद नहि ठाकैं रहा⁸ ॥५ गा सुहाग सुख निवरा, चाँद नाँह वो लीन्ह ।६ सोक संताप बिरह दुख, सेअ पीर महँ दीन्ह ॥७ पाठान्तर—पञ्जाब प्रति— शीर्षश—जबान दादने [मैना] चाँदा रा कैसियत इश्क लोरक बा चाँदा बाज नमूदन् (मैनाका चाबको उत्तर देना और लोरक चाँदके प्रेमको प्रगट करना)। १—सुनहि चाँदा उत्तर हमारा । २—गहिर खम्भाता निसि भै उजियारा । ३—नोंह लीन्ह मईं समाऊ । ४—इछउप । ५—छहिराई । ६—तब वै देख न हैं रुआई । ७—सती रूप पर पुरुषन राँवेहि । ८—सो कत चाँदा ताकि न रहा ।