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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२५८ (रीडिंग्स २५) जबाब दादन चाँदा बर मैना रा (मैनाको चाँइका उत्तर) देखहु बाँगर करै ढिठाई। अइसो पूछत बात सगाई ॥१ मैं तिहँको का अजफर कहा। अइस कहत को ऊतर सहा ॥२ जस आपन तस औरहिं जानै। जस छिनार तस मो क बखानै ॥३ पुरुख छिनार गर को लेयी। यात कहत अस ऊत्तर देयी ॥४ तें का देख हीं पियावारी। चित सखाय मैं हि दीन्हे गारी ॥५ तूँ बितार कुछ छुटन, देस घर लै लै जासि । ६ घर घर खाठ चिखोपसि, खोर खोर चिल्लासि ॥७

२५९ (रीडिंग्स २६, बम्बई ९) जबाब दादने मैना बर चाँदा रा (चाँइको मैनाका जबाब) आन हाइ डर कहें मर जाइ। चाँद [न*] मच्छी¹ मनहि लजाइ॥१ हायहिं मोर वियाहा लीजइ। औ महँ सें त उत्तर² कीजइ ॥२ यह सो कई नाँवें मसवासी³। थो परपुरुख न छाईं पासी ॥३ आप करावइ महि डर लावइ। औ किसेर्सं राबों धावइ ॥४ यह अपग्यान कहूँ आछइ गोबा। झूठ पास बैस फिर रोवा ॥५ बात बरं हँस चाँदा, चहूँ भुवन उजियार । ६ दउ लाग भष आने, गिरह दबाइ फार' ॥७

पाठान्तर--बम्बई प्रति- शीर्षक-मुकातिबा गुफ्तने मैना दर चाँदा रा व बहगा गुफ्तने इश्क बा लारक रा (मैनाका चाँदाके प्रति अपने इसकत् भाव प्रकट करना ओर लोरकक साथ प्रेम करनेकी मन्त्रना करना)।