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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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इस प्रतिमें पंक्ति १, ४, का क्रम ४ १ है। १—चाँद न अछर। २—हरभर। ३—जह पुनि कहे गोपों मरुवाही। ४—और किसेगैं राठर घावर। ५—कै। ६—जरे। ७—दैत लोग अस जानस रिठहि दिवावसि कार। २६० (रिग्ण्डम् २० : बम्बई २१) गुफ्तने भौंरा मर मैना रा व गुफ्नाम दादन (भौंरका मैनाको सुवा कर गाली देना) बात बड़हीं काहे नाहीं। पंडित मुनिवर सठ कराहीं ॥१ पार बूड़ सब पायन' लागैंहिं। पाप केल भरिसा कर मागैंहिं' ॥२ तूँ अमरेल' बोलसि मैंडहाई। औ मँह सें सँ करसि घड़ाई ॥३ साठ छिनार खाल तूँ कढ़ी। काइ कराँ को लीहैं मढ़ी ॥४ देवर जेठ माइ सब लेसी' । ईस' मीत तुरँगवा परदेसी ॥५ तेलि भूँज औ कोरीं', धोबी नाट चेरं ॥६ राँड बाँध सब गाँजसि, फाड़ खोर बहेर ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—रस्म व शुमार खुद नमूने भौंरा व पास गुफ्तन मर मैना रा (भौंरका अपने गुण और सौन्दर्यकी प्रशंसा करना और मैनाको गाली देना)। १—जह पाँवहि। २—कौसन पाप केलि कर मागैंहि। ३—अमरी। ४—लेती। ५—देवर जेठ और सग लेसी। ६—इय। ७—कोहरी। ८—धोबी भाऊ शारी चेर। ९—राँड पात सब गाँजल कापे। टिप्पणी—(४) कढ़ी मढ़ी—'करही, मरही' पाठ भी सम्भव है पर कुछ स्पष्ट अर्थ नहीं बैठता।