भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२११ २६१ (रौलैण्ड्स २८ अ) गुफ्तन मैना चाँदा रा आँचे हिकायत वूद (मैनाका चाँदाकी वास्तविकता प्रकट करना) तूँ जोगिन यह भेस भरावसि । गुनितगार लेखैं चोरावसि ॥१ अस तिरिया फुन सती (कहायइ)। घरौँ घरौँ जग फिर फिरि आवइ॥२ न चलन आइँ एकी घरी । परत दसौँवन ऊपर परी ॥३ दूभइँ तरहुँत चाँदा आयहु । फारक्कीत मुख सरग लुकायहु ॥४ ठेके मार मसार छिपाइ । देखेठँ गयउँ दुआर दिवाइ ॥५ विह दिन फर तूँ बहुर फरी, पाछैं हेरत आइ ।६ दस मंदिर अग जानी रहैंस, नहिं तिह लजाइ ॥७ मूलपाठ—(०) कहावा । टिप्पणी—(३) दसौँवन—बिछौना बिस्तरा । २६२ (रौलैण्ड्स २८ ब : बम्बई २३) जवाब दादने चाँदा मर मैना रा (चाँदाका मैनाको उत्तर) हियैं बितार हाँ तिह पिय जोगू । ऐसो कहा किइ संमो' लोगू ॥१ बिह रुपवन्त हियह धनि मोहे । तिह कैं नारि' न बाँधा सोहै ॥२ सुनतैं देह मोर' अँगराई । देखत मरौं आइ बिगराई ॥३ गाय चरावइ करै दुहावा । तिह सेतैं यहँ अगरग छावा' ॥४ बिह पौराहर मार बसेरा । सीस टूटि चे ऊपर' हेरा ॥५ राइ कुँवर नर नरवई, मन मोहँ एक सिंगार ।६ तोग मसार बेर मरकारूँ, ऊचहि पौर दुआर ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—गुफ्तगौ व बख्शी खुद नमूदन चाँदा व इहानतो हिमाकते लोरक