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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२२ बाज नमून (चाँदाका अपना बड़प्पन बताना और लोरककी निन्दा करना)। १—सँगोइ। २—पाठ। ३—मोर देह। ४—आठ। ५—तिस्सा पद पहले और पहला पद पीछे है। ६—ऊपर को। ७—सँहति। २६३ (रीउँण्ड्स २ १५) जबाब दादने मैना मर चाँदा रा (चाँदाका मैनाका उत्तर) मोर पुरुख खाँड जग आनै। गन गन्धरप सब रूप बखानै ॥१ पंडित पढ़ा खरा सहदेवू। चार बेद बित आप न कोऊ ॥२ भीम बली मोख कै जोरा। राघो बंसफ हुंकुं सोरा ॥३ खिनै पंच से लेत उधारी। अस बनोळ सन साचर डारी ॥४ मोर पीठ सरग कै अछरहिं राखइ। तिहि अइसै पइँ पावैं मोवावइ ॥५ तुरी चड़े रन बाग न मोरे, तू कस भडसि वाहि। ६ भाइ मतार तोर (डरपकना), बानों सेवक आइ ॥७ मूलपाठ—(७) डरपम्ना। टिप्पणी—(२) सहदेव—पाँचों पाण्डवोंमें सहदेव अपने पाण्डित्यके लिए विख्यात थे। (३) भीम—इनकी ख्याति अपने बल के लिए है। राघो—राघव रघुबंशी। किन्तु अहीर होनेके कारण लोरकको रघुबंशी नहीं कहा जा सकता। सम्भवतः मूलपाठ बाधौ (बाधव, यदुबंशी) होगा। (७) डरपकना—डरपोक कायर। २६४ (रीउँण्ड्स २ १५) जबाब दादने चाँदा मर मैना रा (मैनाको चाँदाका उत्तर) जो त सार लीन्ह मइँ साखमि। फिरि कै मैना देखैं न पावसि ॥१ आइ बैसि अस करिहौं मारे। सपनहु संज न आवइ तारे ॥२