भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 264, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 264

२११ ढांकी मूंदि हुती अँधियारी । अब यह पात फरउँ उजियारी ॥३ काह फरै तू मारसि मोरा । दई दीन्हि मैं पावउँ लोरा ॥४ अब गरुवइ होइ आछहु मैनाँ । जीभ सँकोर राखु मुख बैनाँ ॥५ भाइ लोग हुत राठैं, तासो भयउ मेराउ ।६ मोतिन्ह हार मँह घुँघची, मैना सोइ न पाउ ॥७ २६५ (रीडिंग्स २१ ख, बम्बई १४) जवाब दादने मैना बर चाँदा रा (मैनाका चाँदाको उत्तर) पुरुख मग सौं सरभर¹ पावइ । मार पिधाँस खाइ घर आवइ ॥१ मँछु नीरा² चारा कहँ धावइ । लै कै भगत मैंढारन³ आवइ ॥२ मोरा⁴ मे नर मेवा जामी । कहौँ पगाठ होई⁵ गयउ अदाई ॥३ छोडि कैस करिहौ पछितावा । सँमर नेर अँबरॉयहिँ आवा ॥४ देवस घार तुम्ह देंह सुखाइह । साइ मोर कर का घट जाइह ॥५ मैंवर जो पठवै बैने, सील मानय जो भुलाई ।६ बिन एफ [लै*] बास रस, उदरैं कँवल मर जाइ ⁷ ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—मदानगी व दिलावरीए लोरक शुफ्तने मैना व कशदन नमूदने चाँदा रा (मैनाका लोरककी वीरताकी बड़ाई करना और चाँदाको नीचा दिखाना) । १—सरपर । २—नीर । ३—भेंटारहि । ४—मोबर । ५—कहा बारि हर । ६—केइ वर बहुत होइ पछतावा । नेअर चोरल अँवगरहिं आवा ॥ ७—था । ८—मँवर कह फिर बैंसिए दुइ मानत भुलाइ । —बिन एक १ बास रस भँवर कँवल मर जाइ ॥