चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११२ २६६ (रीडिङ्ग्स २१ क) दस्तदराजी कदने चाँदा बा मैना (चाँदका मैनासे हाथापायी करना) अरग ठाइ हुत मैनाँ नारी। दौरि चाँद बरु बाँह पसारी ॥१ ऊपर भाग कै अभरन तानी। हार टूटि गा मोति छरियानी ॥२ एक बेर निकसा दोइ टूटी। माँग सलोनी मानिक फूटी ॥३ टूटि हार घूँघस भये। चोली चीर फाटि कै गये ॥४ रखरी खूँट दोउ धर परी। मानिक हीर पदारथ जरी ॥५ अभरन टूटि बिचर गा, मैनाँ गइ हुँबलाइ ।६ चाँद मेल देउ धर, मिली तराइन आइ ॥७ टिप्पणी—(१) अरग—अलग । (२) छरियानी—छितरा गयी बिखर गया। (५) रखरी—हाथका कडा। खूँट—कानका आभूषण। (६) बिचर—बितर। २६७ (रीडीङ्ग्स २११) मुहकम गिरफ्तने चाँदा सर मैना बा व मैना नीज (मैनाका चाँदको और चाँदका मैना को पकडना) बात चाँद मैना फिरिबिरी। बानु सँबरी सारस धरी ॥१ तानसि चीर चाँद भइ नाँगी। परा हाय गइ फाट इटौंगी ॥२ दस नरख लाग दुहुँ धनहारा। चाँद राव भइ रक्तवहिं धारा॥३ केस छूटि दुहुँ दिसि छिरमाये। जनु निसित अमर्षा अन्ह आये ॥४ सोरह कराँ चाँद के गयी। कराँ उतार घरी एक भयी ॥५ खाल रूप कै बाँगर करी, मैनाँ कढ़ि सिरान ।६ बाँध चाँद गर कापर, केसस चीर परान ॥७