चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंटिप्पणी-(१) फिरिहिरी—चक्कर खाय। सेंबरी—सफ़री, मछली। (३) थनहारा—स्तन। (७) केतस-कितने ही। परान—पखान, पलायन किया, भाग खड़े हुए। २६८ (रौकण्डूस २१२) दर खून शुरु शुदन चाँदा व मैना व हजीमत नमी शुदन (रक्तरंजित होजाने पर भी चाँद-मैनाका पराजित न होना) मिलन काम दोऊ थर अरें। जनु गीर मैमत ऊमरें ॥१ दोऊ नारि ऊमरैं सथूला। नख अंग जनु टेसू फूला ॥२ उमै फरहिं हाथापाई। थन उघार तन ढाँकहि नाहीं ॥३ मरन सींह सो तरुनिहि रीसा। चीर न सँमारहिं भूगर केसा ॥४ मुँह न बोल उतर न देहीं। सीस नाँग जनु भू दह लीहैं ॥५ आइ बहुरि भू लागीं, दुहु महँ हार न कोइ ।६ लोसँचार बिसरिगा, मैंदिर बितारैह होइ ॥७ टिप्पणी—(३) थन—स्तन। उघार—नंगा वस्त्रहीन। (७) लोसँचार—लोक आचार। बितारैह—बितण्डा झगड़ा मारपीट। २६९ (रौकण्डूस २१३) गुरीख्तन बुत अज बुतखाना अज भय भश्रियान (मन्दिरके भीतर युद्ध देख देवताकी परेशानी) पौंदर अम्बर परनि मिळ गयउ। देखहि जीवर साँसत भयउँ ॥१ दउपर रकत भयउ सप लोही। हियें लागि डर मरउँहि न मोही ॥२ देउ कई बिध में न भुलाई। इँदरसभा कै अच्छरहिं आयीं ॥३ मन वो दुहूँ मँह एको मरी। इँदर राय महँ बिठफइँ परी ॥४ चला देउ हरुवा मन्ति-लागी। छाड़ि मैंदिर निसरा डर भागी ॥५